जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होय l ऐसे ही और अधिक बहुत ही सुन्दर कबीर दास जी के दोहे अर्थ सहित
जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होय यह आपा तो डाल दे, दया करे सब कोय कबीर मन की पवित्रता पर ज्यादा जोर देते हैं। वह कहते हैं कि यदि आपका मन साफ और शीतल है तो इस संसार में कोई भी मनुष्य आपका दुश्मन नहीं हो सकता है, लेकिन अगर आप अपने अहंकार को नहीं छोड़ेंगे, तो आपके बहुत से लोग दुश्मन बन जाएंगे। ऐसे में यदि आप समाज में खुश रहना चाहते हैं, तो किसी को भी अपना दुश्मन न बनाएं। सभी से प्रेमपूर्वक व्यवहार कीजिए। स भी आपके दोस्त बनकर रहेंगे। गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूं पाँय । बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय॥ भावार्थ: कबीर दास जी इस दोहे में कहते हैं कि अगर हमारे सामने गुरु और भगवान दोनों एक साथ खड़े हों तो आप किसके चरण स्पर्श करेंगे? गुरु ने अपने ज्ञान से ही हमें भगवान से मिलने का रास्ता बताया है इसलिए गुरु की महिमा भगवान से भी ऊपर है और हमें गुरु के चरण स्पर्श करने चाहिए। यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान । शीश दियो जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान । भावार्थ: कबीर दास जी कहते हैं कि यह जो शरीर है वो विष जहर से भरा हुआ है और गुरु अमृत की खान हैं। अगर अपना शीशसर देने के बदले...
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