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यमुना माँ जो देती है हमे हर मुश्किल से बचाव का उपाय -सबसे पहले एक जयकारा यमुना माता के नाम का - जय यमुना माता l यमुना मैया के स्नान दान से होने वाले विशेष लाभ सर्वप्रथम यमुना मैया हमे नव ग्रह पीड़ा से मुक्ति साथ ही पित्र दोष भूत प्रेत आदि बुरी शक्तियों से इसके अलावा कैसी भी नकारात्मक शक्ति हो रोग पीड़ा आदि हो चर्म रोग हो सभी का उपाय माता की भक्ति और स्नान दान पूजा भक्ति से आसानी से हो जाता है l ऐसे मे हम इन सभी परेशानियों से मुक्ति के लिए बस एक ही उपाय करे j शनिवार या रविवार आप यमुना के तट पर जाये साथ में दो पिंड आटे के एक चौमुख दीपक सरसों के तेल का 5 अगरबत्ती एक कपूर थोड़े से आटे के सरसों के तेल से तले मीठे पूडे और थोड़े से मूर मूरे पानी मे मछलियों और पानी से जुड़े जीवो के खाने के लिए l आप संध्या के समय शनिवार या रविवार यमुना की पूजा स्नान के बाद चौमुख दीपक यमुना माता के नाम का आवाह्न करते हुए जलाये कपूर जीत जलाये धूप बत्ती और 5 अगरबत्ती वहीं जलाये गुरु महाराज और अपने ईस्ट देवी के नाम की और जो दो पिंड आए के है उनपर थोड़ा मीठा गुड़ या बुरा आदि रख के उनपर जल अर्पित करे और एक एक मीठा पुड़ा वहीं साथ साथ मे रखे और उसके बाद आप मूर मूरे थोड़े से पक्षियों को डाले और oude तोड़ कर पक्षियों को भी और मछलियों के लिए जल मे भी l अब आप इसके बाद कपूर जोत पानी में बहा दे और चौमुख दीपक भी किसी दोने या पत्तल में रखकर दक्षिणी-पश्चिमी दिशा की ओर मुह करके जल प्रवाहित करे फिर इसके बाद आप माता का आह्वान करे और हाथ जोड़ के प्रार्थना करे कि है यमुना माता मैंने जो आपकी पूजा की प्रसाद चढ़ाया और धूप दीप दान दिया इसे स्वीकार करो और अगर कहीं पूजा या विधि मे गलती हो तो क्षमा करना आप मुझे हर परेशानियों से बचाए और जो भी क्लेश है उन्हें शांत करो और मेरी सहायता करो मैं आपकी शरण में हू आप ही सहायक हो मुझे हर मुश्किल से परेशानी से बचाओ l फिर आप अपने घर आ जाओ l ऐसा एक दो बार करो अवश्य ही आपके काम बनने लगेंगे l जय यमुना मैया जय गुरु महाराज जय शिव शंकर अलख आदेश सिद्ध बाबा 8800904355 https://youtu.be/p0D-7U3v00U

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माँ यमुना बचाती है हमे हरपल हर ग्रह बुरी निगाह से  : सबसे पहले एक जयकारा यमुना माता के नाम का - जय यमुना माता l यमुना मैया के स्नान दान से होने वाले विशेष लाभ  सर्वप्रथम यमुना मैया हमे नव ग्रह पीड़ा से मुक्ति साथ ही पित्र दोष भूत प्रेत आदि बुरी शक्तियों से इसके अलावा कैसी भी नकारात्मक शक्ति हो रोग पीड़ा आदि हो चर्म रोग हो सभी का उपाय माता की भक्ति और स्नान दान पूजा भक्ति से आसानी से हो जाता है l ऐसे मे हम इन सभी परेशानियों से मुक्ति के लिए बस एक ही उपाय करे j शनिवार या रविवार आप यमुना के तट पर जाये साथ में दो पिंड आटे के एक चौमुख दीपक सरसों के तेल का 5 अगरबत्ती एक कपूर थोड़े से आटे के सरसों के तेल से तले मीठे पूडे और थोड़े से मूर मूरे पानी मे मछलियों और पानी से जुड़े जीवो के खाने के लिए l आप संध्या के समय शनिवार या रविवार यमुना की पूजा स्नान के बाद चौमुख दीपक यमुना माता के नाम का आवाह्न करते हुए जलाये कपूर जीत जलाये धूप बत्ती और 5 अगरबत्ती वहीं जलाये गुरु महाराज और अपने ईस्ट देवी के नाम की और जो दो पिंड आए के है उनपर थोड़ा मीठा गुड़ या बुरा आदि रख के उनपर जल अर्पित करे और एक ए...

गुरु कृपा-सिद्ध बाबा गुरु गोरख नाथ : आज हम सभी आभारी है बाबा गोरख नाथ जी के जो आज उनके द्वारा दिए गए उपदेशों से और अपने दिए गए शाबर मन्त्रों से मानव जीवन कुछ आसान और तंत्र से भक्तों का देवताओ से जुड़ने का आसान रास्ता या कहें तरीका हिन्दू सम्प्रदाय को सौप दिया l गुरु प्रथा गुरु आचरण गुरु संस्कार गुरु महत्व गुरु भक्ति विधान और गुरु के प्रति अत्याधिक प्रेम उनके स्वभाव और संकल्प शक्ति विचारो के माधुर्य रस से झलकता हुआ आज भी सच्चे भक्त गुरु मे उसी तरह विद्यमान है जो उनके समय मे और उनके गुरु दादा गुरु मछद्र नाथ समाहित था बस कमी है तो इस बात की कि आज कल गुरु बनाने से पहले ज़न मानस गुरु के विशेष गुण की कल्पनाओ से अपने मन में एक विचार बना लेते है कि गुरु ऐसा हो गुरु वैसा हो उसकी शक्तियां तंत्र कला मंत्र क्रियाएं प्रयोग भविष्यवक्ता गुण आदि के बारे मे सोच कर गुरु की खोज करते हैं किन्तु अपने विचारो मे ये बातें नहीं ला पाते कि गुरु एक संस्कार है और सामर्थ्य शक्ति जो हमारी भक्ति को बल देती है और भक्ति ही हमारी सकारात्मक ऊर्जा बनकर हमे हर तरीके के नकारत्मक विचारो बूरी आत्माओं गलत क्रियाओं के प्रयोग से बचाती है और ऐसे कर्मों को करने गुरु हमेशा आपको रोकते है l जब कि यहां आज कलयुग में शुरू शुरू में अपना ही पूरा परिचय देना पड़ जाता है और फिर जहां बात आती है शांति और संतोष की तो वहां पर नई पीढ़ी भौतिक चीज़ों की उपलब्धी चाहती है तंत्र मंत्र यंत्र यज्ञ आदि साधनाओं से सुख साधन पाकर शांति चाहते है जब कि बाबा गोरख नाथ और शंकर भगवान का एक ही विचार की शून्य अवस्था ही सुख का आधार l अब बात आती है यहा आधार ही जब शून्य है सुख साधन का फिर यहां लोग लगे है बडे बड़े साधन एकत्रित करके सत्संग मे लिन है नाचने गाने मे सब गाने बजाने सुनने कहने और नाचने मे व्यस्त कि अचानक बत्ती गुल हुई और सब साधन रह गए अधर मे क्योंकि बत्ती नहीं तो विचार कैसे फैलाए अब l अब आप ये सोचिए यहा सारा खेल था साधनो का l इसके विपरित इतने साधन ना एकत्र करके सिर्फ ज्ञान ध्यान पर बल दिया जाता और इस ज़न मानस को एकत्रित करके इनका बौद्धिक विकास करते हुए साधनो से दूरी की दीक्षा दी जाती और संदेश उसमे ये होता कि अत्याधिक की चाह अहंकार का रास्ता है और एकत्रित या कहिये संग्रहित धन ये भाव बार बार लाएगा की कहीं हानि ना हों जाए धन चोरी ना हो जाए कोई हड़प ना ले इस धन की वज़ह से कोई हमारी हत्या ना कर दे l कहने का मतलब है कि ये सभी भौतिकता वादी साधन आपको कमजोर बनाएंगे l इनका संचय जितना हो सके कम कीजिए और ज्ञान संग्रह जितना हो अधिक से अधिक l ताकि मन मे कोई भार ना रहे l ये सभी ह्रदय की दुर्बलता के विषय बिंदु है linse जितनी आपकी दूरी होगी आपकी बौद्धिक क्षमता उतनी ही प्रबल और ज्ञान की ओर विकसित होगी l सूक्ष्म साधन ही सुख दे सकते है ज्ञान का l बाकि अगर आप भौतिकता वादी शैली इस सनातन धर्म को मानकर सुख चाहते हो तो कहीं सुख नहीं l बौद्धिक विकास चलता रहे और प्रभुत्व में तन मन लिन रहे बस ऐसी भक्ति ही हमे शून्यता की ओर ले जाएगी l जहा परमार्थ शक्ति शिव शंभु ज़ति गुरु गौरक्ष का मोक्ष रूपी परम धाम है l जय बाबा की l ॐ शिव गौरक्ष आदेश 🚩

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सिद्ध बाबा - एक नाम, आज हम सभी कहीं ना कहीं इस बात से परेशान है कि मनुष्य जीवन का आधार क्या है हम क्या,कहाँ और क्यों के फ़ेर में हमेशा फंसे रहते है चाहकर भी हम ये फ़ैसला नहीं कर पाते कि सत्य का आधार क्या है क्यों हम हर दिन चिंता मे कहीं ना कहीं व्यस्त और खोए रहते हैं l

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आदेश आदेश सतनाम आदेश गुरु जी को आदेश  गुरू नाम सर्वोपरि  जय गुरु महाराज  जय शिव गौरक्ष जय जय गौरक्ष